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बाल मुनि ने 750 श्लोक से परीपूर्ण आगम का किया वाचन

12 साल की उम्र मे जिनशशान मे किया नाम

रिपोर्टर संजय जैन बड़ोद आगर मालवा

बाल मुनि ने 750 श्लोकों से परिपूर्ण आगम का किया वांचन

 

बड़ौद। बुधवार को प्रातः 09 बजे श्री आनंद चंद्र जैन आराधना भवन में परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री नयचंद्र सागर सूरीश्वरजी महाराजा के 12 वर्षीय शिष्य

बाल मुनि श्री विजयचंद्र सागरजी महाराज साहेब के मुखारविंद से मौखिक 750 गाथा से परिपूर्ण आगम दशवे कालिक सूत्र का वांचन मात्र 27 मिनट में किया

गया। बड़ौद नगर के लिए यह पहला अवसर था, जिसमें कोई बाल संत आंखें मूंदकर, हाथ जोड़कर

निरंतर आगम दशवे कालिक में वर्णित 750 संस्कृत श्लोक बोल रहे थे। मुनिराज पूज्य अजितचंद्र सागरजी महाराजा ने बताया कि इस सूत्र में परमात्मा महावीर

स्वामी के बताई हुयी वाणी के साथ ही सुधर्म स्वामी द्वारा बताये साधु-साध्वियों के आचरण भी सम्मिलित हैं।

पूज्य श्री ने बताया कि बाल मुनि दीक्षा पूर्व आपके बेटे जैसा सामान्य ही थे, किंतु आचार्य भगवंत के उसके अंदर रही शक्तियों को पहचान लिया ओर एक बार में

धाराप्रवाह 750 गाथा का वांचन कर मां सरस्वती को साध लिया। किसी माता-पिता ने अपनी संतान को छोड़ा, स्नेह-ममत्व का त्याग किया, और शासन को

अपनी संतान को सौपा, उसका परिणाम आज हमारे समक्ष है। आज आपने आगम सुना, किंतु यह तय करे की गुरुदेव की वाणी से हम सभी संपूर्ण 45 आगमों

का श्रवण करें। ट्रस्टी ललित जै. राजावत ने बताया कि आचार्य श्री नयचंद्र सागर सूरीश्वरजी महाराजा एवं साध्वीवर्या अमिवर्षा श्रीजी महाराजा साहेब आदि ठाणा बड़ौद से विहार कर इंदौख, झार्डा, महिदपुर

होकर अधिष्ठायक देव श्री माणिभद्र की स्थली भैरवगढ़ उज्जैन पंहुचेगें, जहाँ पर तिन दिवसीय बसंतपंचमी की साधना करेगें। उसके उपरांत इंदौर महानगर में

आयोजित आचार्य पद महोत्सव में अपना सानिध्य प्रदान करेंगे।

जानकारी ललित जैन राजावत जी के द्वारा मिली

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